Published on Jul 14, 2026
झारखंड सरकार राज्य में पोषक अनाज (Millets) की खेती को बढ़ावा देने के लिए झारखंड राज्य मिलेट मिशन के अंतर्गत मिलेट किसान योजना 2026-27 संचालित कर रही है। इस योजना का उद्देश्य किसानों को पारंपरिक मोटे अनाज की खेती के लिए प्रोत्साहित करना, उनकी आय बढ़ाना और राज्य में पोषण सुरक्षा को मजबूत बनाना है।
योजना के तहत रागी (मडुआ), बाजरा, ज्वार, सांवा, कोदो, कंगनी, चीना, कुटकी, चौलाई जैसी मिलेट फसलों की खेती करने वाले किसानों को प्रति एकड़ ₹3,000 की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। अधिकतम 5 एकड़ तक सहायता मिलने के कारण एक पात्र किसान ₹15,000 तक का लाभ प्राप्त कर सकता है।
यदि आप झारखंड के किसान हैं और 2026-27 में मिलेट फसलों की खेती करना चाहते हैं, तो यह योजना आपके लिए लाभदायक हो सकती है। इस लेख में हम योजना की पात्रता, लाभ, आवेदन प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी विस्तार से बताएंगे।
झारखंड मिलेट किसान योजना राज्य सरकार द्वारा संचालित एक कृषि प्रोत्साहन योजना है, जिसे झारखंड राज्य मिलेट मिशन के अंतर्गत लागू किया गया है।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को मोटे अनाज की खेती के लिए आर्थिक सहायता देना, कम पानी में होने वाली फसलों का उत्पादन बढ़ाना तथा पौष्टिक अनाज को लोगों के भोजन का हिस्सा बनाना है।
आज के समय में मोटे अनाज को "श्री अन्न (Shree Anna)" के नाम से भी बढ़ावा दिया जा रहा है क्योंकि इनमें पोषण तत्व अधिक होते हैं और इनकी खेती अपेक्षाकृत कम लागत में की जा सकती है।
राज्य सरकार इस योजना के माध्यम से कई महत्वपूर्ण लक्ष्य हासिल करना चाहती है।
मुख्य उद्देश्य—
योजना के अनुसार पात्र किसानों को मिलेट फसल की खेती पर आर्थिक प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
| विवरण | सहायता राशि |
|---|---|
| प्रति एकड़ सहायता | ₹3,000 |
| अधिकतम क्षेत्र | 5 एकड़ |
| अधिकतम सहायता | ₹15,000 |
यदि कोई किसान 5 एकड़ तक मिलेट की खेती करता है, तो उसे कुल ₹15,000 तक की प्रोत्साहन राशि मिल सकती है।
इस योजना के अंतर्गत कई प्रकार के मोटे अनाज (Millets) शामिल किए गए हैं।
इनमें प्रमुख हैं—
इन फसलों की खेती करने वाले पात्र किसान योजना का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
पिछले कुछ वर्षों में मोटे अनाज की मांग तेजी से बढ़ी है। इन फसलों को पोषण से भरपूर माना जाता है और ये कम पानी तथा कठिन मौसम में भी अच्छी पैदावार देती हैं।
मिलेट फसलों के प्रमुख लाभ—
इन्हीं कारणों से केंद्र और राज्य सरकारें मिलेट उत्पादन को लगातार बढ़ावा दे रही हैं।
इस योजना का लाभ केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है।
इसके अन्य लाभ—
✅ खेती की लागत कम होगी।
✅ सरकार से प्रोत्साहन राशि मिलेगी।
✅ पोषक अनाज की खेती को बढ़ावा मिलेगा।
✅ बाजार में बेहतर मांग मिलने की संभावना बढ़ेगी।
✅ किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
✅ जलवायु अनुकूल खेती को बढ़ावा मिलेगा।
झारखंड सरकार ने इस योजना का लाभ अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाने के लिए पात्रता की शर्तें सरल रखी हैं। यदि आप झारखंड के निवासी हैं और मिलेट (मोटे अनाज) की खेती करते हैं या करने की योजना बना रहे हैं, तो आप इस योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं।
योजना का लाभ मुख्य रूप से निम्नलिखित किसानों को दिया जाएगा—
यदि आप नीचे दी गई शर्तें पूरी करते हैं, तो इस योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं—
✅ आवेदक झारखंड का स्थायी निवासी होना चाहिए।
✅ किसान के पास स्वयं की भूमि (रैयत) हो या वह बटाईदार किसान हो।
✅ आवेदक वित्तीय वर्ष 2026-27 में मिलेट फसलों की खेती कर रहा हो या करने का इच्छुक हो।
✅ खेती झारखंड राज्य के भीतर की जा रही हो।
✅ आवेदन के समय सही दस्तावेज उपलब्ध होने चाहिए।
आवेदन करते समय सामान्यतः निम्न दस्तावेजों की आवश्यकता हो सकती है—
नोट: अंतिम दस्तावेजों की सूची जिला कृषि कार्यालय या आधिकारिक पोर्टल पर जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार अलग हो सकती है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जिला कृषि विभाग द्वारा आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। पात्र किसान निम्न प्रक्रिया का पालन कर सकते हैं—
सबसे पहले अपने नजदीकी—
से योजना की जानकारी प्राप्त करें।
यदि आवेदन ऑफलाइन हो रहा है, तो संबंधित कृषि कार्यालय से आवेदन पत्र प्राप्त करें। यदि विभाग ऑनलाइन आवेदन शुरू करता है, तो आधिकारिक पोर्टल पर जाकर आवेदन किया जा सकता है।
फॉर्म में मांगी गई सभी जानकारी सही-सही भरें—
फॉर्म के साथ सभी आवश्यक दस्तावेजों की स्वप्रमाणित (Self Attested) प्रतियां संलग्न करें। भरा हुआ आवेदन संबंधित कृषि कार्यालय में जमा करें। यदि ऑनलाइन आवेदन की सुविधा उपलब्ध हो, तो सभी दस्तावेज अपलोड करके आवेदन सबमिट करें। आवेदन जमा होने के बाद विभागीय अधिकारी खेत एवं दस्तावेजों का सत्यापन कर सकते हैं। सत्यापन सफल होने पर किसान योजना के लिए पात्र माना जाएगा।
सत्यापन पूरा होने के बाद पात्र किसानों को योजना के तहत निर्धारित प्रोत्साहन राशि सीधे उनके बैंक खाते (DBT) के माध्यम से भेजी जा सकती है।
इसलिए आवेदन करते समय बैंक खाते की सही जानकारी देना आवश्यक है।
इस योजना की एक खास बात यह है कि केवल भूमि स्वामी ही नहीं, बल्कि बटाईदार किसान भी योजना का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
इससे ऐसे किसानों को भी आर्थिक सहायता मिलेगी जो स्वयं की जमीन न होने के बावजूद खेती करते हैं।
राज्य सरकार का लक्ष्य उन क्षेत्रों में मिलेट उत्पादन बढ़ाना है जहां—
मिलेट यानी मोटे अनाज को आज के समय में "श्री अन्न (Shree Anna)" के रूप में पहचान मिल रही है। केंद्र और राज्य सरकारें इन फसलों को बढ़ावा दे रही हैं क्योंकि ये पोषण से भरपूर होने के साथ-साथ कम लागत और कम पानी में भी अच्छी पैदावार देती हैं।
झारखंड जैसे राज्य में, जहां कई क्षेत्रों में वर्षा आधारित खेती होती है, वहां मिलेट फसलें किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प बन सकती हैं।
मिलेट फसलों की खेती से किसानों और उपभोक्ताओं दोनों को लाभ मिलता है।
रागी, बाजरा, ज्वार, कोदो जैसी फसलों को धान या अन्य पारंपरिक फसलों की तुलना में कम सिंचाई की जरूरत होती है।
इन फसलों में उर्वरक और कीटनाशकों का उपयोग अपेक्षाकृत कम होता है, जिससे खेती की लागत भी कम आती है।
मिलेट फसलें सूखा और प्रतिकूल मौसम की स्थिति को अन्य फसलों की तुलना में बेहतर सहन कर सकती हैं।
इन अनाजों में—
की मात्रा अधिक होती है, इसलिए इन्हें स्वास्थ्य के लिए लाभदायक माना जाता है।
देश और विदेश दोनों जगह मोटे अनाज की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में भविष्य में किसानों को बेहतर बाजार और उचित मूल्य मिलने की संभावना भी बढ़ रही है।
झारखंड सरकार का उद्देश्य केवल किसानों को आर्थिक सहायता देना नहीं है, बल्कि राज्य में टिकाऊ कृषि (Sustainable Farming) को बढ़ावा देना भी है।
योजना से सरकार निम्नलिखित लक्ष्य हासिल करना चाहती है—
यदि आप इस योजना का लाभ लेना चाहते हैं, तो निम्न बातों का ध्यान रखें—
✔️ समय पर आवेदन करें।
✔️ कृषि विभाग के दिशा-निर्देशों का पालन करें।
✔️ केवल अनुमोदित मिलेट फसलों की खेती करें।
✔️ बैंक खाते की जानकारी सही दें।
✔️ खेती से संबंधित सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।
✔️ प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लें ताकि आधुनिक खेती की तकनीक सीख सकें।
यदि आप किसान हैं या झारखंड सरकार की अन्य योजनाओं की जानकारी चाहते हैं, तो ये लेख भी पढ़ें—
यह झारखंड सरकार की कृषि प्रोत्साहन योजना है, जिसके तहत किसानों को मिलेट (मोटे अनाज) की खेती के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
योजना के अंतर्गत प्रति एकड़ ₹3,000 की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। अधिकतम 5 एकड़ तक लाभ मिलने पर किसान ₹15,000 तक की सहायता प्राप्त कर सकता है।
रागी (मडुआ), ज्वार, बाजरा, कंगनी, सांवा, कोदो, चीना, कुटकी, चौलाई तथा अन्य अधिसूचित मिलेट फसलें।
हाँ। विभागीय पात्रता के अनुसार रैयत (भूमि स्वामी) और बटाईदार (Sharecropper) दोनों प्रकार के पात्र किसान योजना का लाभ ले सकते हैं।
हाँ। यदि महिला किसान पात्रता की सभी शर्तें पूरी करती हैं, तो वे भी इस योजना के लिए आवेदन कर सकती हैं।
आवेदन की प्रक्रिया जिला कृषि कार्यालय, प्रखंड कृषि कार्यालय या कृषि विभाग द्वारा निर्धारित माध्यम (ऑफलाइन/ऑनलाइन) से पूरी की जा सकती है। नवीनतम जानकारी के लिए अपने जिले के कृषि विभाग से संपर्क करें।
इस योजना से किसानों को आर्थिक सहायता मिलने के साथ-साथ पोषक अनाज की खेती को बढ़ावा, कम लागत वाली खेती का अवसर और भविष्य में बेहतर बाजार मिलने की संभावना बढ़ती है।
संबंधित विभाग:
कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग, झारखंड सरकार
संपर्क करें:
आधिकारिक पोर्टल:
झारखंड कृषि विभाग / झारखंड राज्य मिलेट मिशन (यदि आपके जिले में ऑनलाइन आवेदन उपलब्ध हो)
झारखंड मिलेट किसान योजना 2026 राज्य के किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। इस योजना के माध्यम से सरकार मोटे अनाज की खेती को बढ़ावा देने के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने और टिकाऊ कृषि प्रणाली को मजबूत बनाने का प्रयास कर रही है।
यदि आप झारखंड के पात्र किसान हैं और रागी, बाजरा, ज्वार, कोदो, सांवा, कंगनी, कुटकी या अन्य मिलेट फसलों की खेती करते हैं, तो इस योजना का लाभ अवश्य लें। प्रति एकड़ ₹3,000 और अधिकतम ₹15,000 तक की प्रोत्साहन राशि आपके खेती के खर्च को कम करने और उत्पादन बढ़ाने में सहायक हो सकती है।
समय पर आवेदन करें, आवश्यक दस्तावेज तैयार रखें और कृषि विभाग द्वारा जारी नवीनतम निर्देशों का पालन करते हुए इस योजना का अधिकतम लाभ उठाएं।