Published on Jul 01, 2026
रांची: झारखंड सरकार द्वारा वर्ष 2023 में शुरू की गई मुख्यमंत्री फेलोशिप योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन मेधावी शोधार्थियों को उच्च शिक्षा और पीएचडी के दौरान आर्थिक सहायता प्रदान करना था। सरकार ने इस योजना के तहत हर वर्ष 1000 शोधार्थियों को लाभ देने का लक्ष्य निर्धारित किया था, लेकिन तीन वर्ष बाद भी योजना अपने लक्ष्य से काफी पीछे दिखाई दे रही है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अब तक करीब 150 शोधार्थियों को ही इस योजना का लाभ मिल पाया है। जबकि हजारों पात्र विद्यार्थी अब भी इस योजना से वंचित हैं।
झारखंड मुख्यमंत्री फेलोशिप योजना की शुरुआत अगस्त 2023 में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में की गई थी। पहले चरण में 50 मेधावी शोधार्थियों का चयन कर उन्हें फेलोशिप का लाभ दिया गया।
इसके बाद वर्ष 2024 और 2025 में भी आवेदन आमंत्रित किए गए, लेकिन लाभार्थियों की संख्या अपेक्षा के अनुरूप नहीं बढ़ सकी।
वर्तमान में वर्ष 2026 के लिए भी आवेदन प्रक्रिया जारी है, इसलिए अंतिम लाभार्थियों का आंकड़ा अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
मुख्यमंत्री फेलोशिप योजना के तहत झारखंड के सरकारी एवं निजी विश्वविद्यालयों में पीएचडी कर रहे पात्र विद्यार्थियों को अधिकतम चार वर्षों तक आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
योजना के तहत वर्तमान में मिलने वाली सहायता राशि इस प्रकार है:
सरकार का उद्देश्य है कि आर्थिक तंगी के कारण किसी भी मेधावी छात्र का शोध कार्य प्रभावित न हो।
योजना का लाभ लेने वाले कई विद्यार्थियों का कहना है कि यह योजना उनके लिए काफी उपयोगी साबित हुई है, लेकिन वर्तमान महंगाई और शोध कार्य में होने वाले खर्चों को देखते हुए ₹25,000 प्रतिमाह की राशि पर्याप्त नहीं है।
कई शोधार्थियों ने सरकार से स्टाइपेंड बढ़ाकर ₹35,000 प्रतिमाह करने की मांग की है, ताकि शोध कार्य बिना आर्थिक दबाव के पूरा किया जा सके।
शोधार्थियों और शिक्षाविदों का मानना है कि योजना के अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने के पीछे कई कारण हैं।
मुख्य कारणों में शामिल हैं:
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल आर्थिक सहायता देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि विश्वविद्यालयों में शोध का बेहतर वातावरण तैयार करना भी आवश्यक है।
तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग के प्रधान सचिव राहुल पुरवार के अनुसार मुख्यमंत्री फेलोशिप योजना पूरी तरह ऑनलाइन प्रक्रिया पर आधारित है।
उन्होंने बताया कि जैसे-जैसे विद्यार्थी ऑनलाइन आवेदन कर रहे हैं और पात्र पाए जा रहे हैं, उन्हें योजना का लाभ दिया जा रहा है। वर्ष 2026 के लिए आवेदन प्रक्रिया अभी जारी है, इसलिए आने वाले समय में लाभार्थियों की संख्या बढ़ने की संभावना है।
झारखंड मुख्यमंत्री फेलोशिप योजना राज्य के शोधार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है, लेकिन निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले लाभार्थियों की संख्या अभी भी काफी कम है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विश्वविद्यालयों में शोध सुविधाओं का विस्तार, पर्याप्त गाइड की उपलब्धता और विद्यार्थियों के बीच योजना की बेहतर जानकारी सुनिश्चित की जाए, तो यह योजना अपने वास्तविक उद्देश्य को पूरा कर सकती है और अधिक से अधिक मेधावी छात्रों को उच्च शिक्षा में आगे बढ़ने का अवसर मिल सकेगा।