Published on Jun 24, 2026
झारखंड सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार और पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के अंतर्गत "व्यावसायिक बकरा-बकरी पालन योजना" चला रही है। इस योजना के तहत राज्य के इच्छुक पशुपालकों को 100 बकरियों और 5 बकरों की क्षमता वाले व्यावसायिक फार्म की स्थापना के लिए लगभग 70 प्रतिशत तक अनुदान (सब्सिडी) दिया जाएगा।
सरकार का उद्देश्य ग्रामीण युवाओं, किसानों, स्वयं सहायता समूहों (SHG) और किसान उत्पादक संगठनों (FPO) को आत्मनिर्भर बनाना तथा पशुपालन के माध्यम से आय बढ़ाना है।
यह योजना मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के अंतर्गत संचालित की जा रही है। इसके तहत व्यावसायिक स्तर पर बकरी पालन को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
योजना के अंतर्गत 100 बकरियों और 5 बकरों की क्षमता वाले आधुनिक बकरी फार्म की स्थापना की जा सकती है। सरकार इस परियोजना पर होने वाले खर्च का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा अनुदान के रूप में देगी।
इस योजना को शुरू करने का मुख्य उद्देश्य है:
✔ ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार उपलब्ध कराना
✔ पशुपालन व्यवसाय को बढ़ावा देना
✔ किसानों की अतिरिक्त आय सुनिश्चित करना
✔ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना
✔ बेरोजगारी कम करना
✔ आत्मनिर्भर झारखंड के लक्ष्य को मजबूत करना
योजना के अनुसार:
कुल परियोजना लागत: लगभग ₹9,78,000
सरकारी अनुदान (70%): लगभग ₹6,84,000
लाभुक अंशदान एवं बैंक ऋण: शेष राशि
सरकार द्वारा अनुदान दो चरणों में दिया जाएगा:
कुल अनुदान राशि का 40%
कुल अनुदान राशि का 60%
राज्य सरकार द्वारा कुल 437 लाभुकों का चयन किया जाएगा।
वर्गवार संभावित लाभुक:
सामान्य वर्ग: 219
अनुसूचित जाति (SC): 29
अनुसूचित जनजाति (ST): 189
निम्नलिखित व्यक्ति एवं संस्थाएं योजना के लिए पात्र हैं:
✔ झारखंड के स्थायी निवासी
✔ किसान
✔ पशुपालक
✔ बेरोजगार युवा
✔ स्वयं सहायता समूह (SHG)
✔ किसान उत्पादक संगठन (FPO)
✔ बकरी पालन में रुचि रखने वाले उद्यमी
आवेदक को निम्न शर्तें पूरी करनी होंगी:
आवेदक झारखंड राज्य का स्थायी निवासी होना चाहिए।
बकरी पालन का पूर्व अनुभव रखने वाले आवेदकों को प्राथमिकता दी जाएगी।
100 बकरियों और 5 बकरों की क्षमता वाले फार्म के लिए कम से कम आधा एकड़ भूमि होनी चाहिए।
भूमि:
स्वयं की हो सकती है
या कम से कम 10 वर्ष की वैध लीज पर हो सकती है
आवेदक को बैंक बैलेंस या बैंक द्वारा जारी वित्तीय प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा।
चयनित लाभुक को कम से कम 10 वर्षों तक परियोजना संचालित करने का शपथ पत्र देना होगा।
योजना में आवेदन के लिए निम्न दस्तावेजों की आवश्यकता हो सकती है:
आधार कार्ड
निवास प्रमाण पत्र
बैंक पासबुक
पासपोर्ट साइज फोटो
भूमि संबंधी दस्तावेज
लीज एग्रीमेंट (यदि लागू हो)
बकरी पालन प्रशिक्षण प्रमाण पत्र (यदि उपलब्ध हो)
मोबाइल नंबर
जाति प्रमाण पत्र (आरक्षित वर्ग हेतु)
योजना के अंतर्गत लाभुकों का चयन निर्धारित मानकों के आधार पर किया जाएगा।
निम्न आवेदकों को प्राथमिकता मिल सकती है:
प्रशिक्षित बकरी पालक
पशुपालन का अनुभव रखने वाले व्यक्ति
स्वयं सहायता समूह
किसान उत्पादक संगठन
ग्रामीण स्वरोजगार से जुड़े उद्यमी
बकरी पालन ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से बढ़ता हुआ व्यवसाय है।
इसके प्रमुख लाभ:
✔ कम लागत में शुरुआत
✔ बाजार में लगातार मांग
✔ दूध एवं मांस दोनों से आय
✔ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार
✔ महिलाओं के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत
✔ छोटे किसानों के लिए लाभकारी व्यवसाय
इस योजना के माध्यम से:
स्वरोजगार बढ़ेगा
ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि होगी
पशुपालन क्षेत्र का विकास होगा
किसानों को अतिरिक्त आमदनी मिलेगी
स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ेंगे
यह मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के अंतर्गत संचालित योजना है, जिसमें व्यावसायिक बकरी फार्म स्थापित करने के लिए 70% तक सब्सिडी दी जाती है।
लगभग ₹9.78 लाख की परियोजना लागत पर करीब ₹6.84 लाख तक का अनुदान मिल सकता है।
योजना के तहत 100 बकरियों और 5 बकरों की क्षमता वाला फार्म स्थापित किया जाएगा।
हाँ, स्वयं सहायता समूह (SHG) और किसान उत्पादक संगठन (FPO) भी आवेदन कर सकते हैं।
प्रशिक्षण अनिवार्य नहीं है, लेकिन प्रशिक्षित आवेदकों को प्राथमिकता मिल सकती है।
आवेदन प्रक्रिया से संबंधित जानकारी जिला पशुपालन कार्यालय या राज्य सरकार के संबंधित विभाग द्वारा जारी की जाती है।
झारखंड बकरी पालन योजना 2026 राज्य के किसानों, युवाओं और पशुपालकों के लिए एक सुनहरा अवसर है। लगभग 70% तक सरकारी सब्सिडी मिलने से व्यावसायिक बकरी पालन व्यवसाय शुरू करना आसान हो जाता है। यदि आप पशुपालन के क्षेत्र में स्वरोजगार शुरू करना चाहते हैं, तो यह योजना आपके लिए लाभदायक साबित हो सकती है। योजना से संबंधित नवीनतम आवेदन सूचना और दिशा-निर्देश के लिए जिला पशुपालन कार्यालय से संपर्क करते रहें।